हिलेरी क्लिंटन और एपस्टीन की वायरल तस्वीरें एआई-निर्मित और फर्जी

0

वॉशिंगटन – डिजिटल दुष्प्रचार के एक बड़े मामले में, पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और दिवंगत सजायाफ्ता अपराधी जेफरी एपस्टीन की साथ दिखाई देने वाली कई वायरल तस्वीरों को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) द्वारा निर्मित और फर्जी पाया गया है। ये तस्वीरें हिलेरी क्लिंटन द्वारा ‘हाउस ओवरसाइट कमेटी’ के समक्ष दी गई उस गवाही के बाद सामने आईं, जिसमें उन्होंने एपस्टीन के साथ किसी भी व्यक्तिगत संबंध या उसके आवास पर जाने की बात से स्पष्ट इनकार किया था।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित इन तस्वीरों का उद्देश्य क्लिंटन के सार्वजनिक बयानों को झूठा साबित करना था। हालांकि, डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों और एआई डिटेक्शन टूल्स ने इन तस्वीरों में कई विसंगतियों को चिन्हित करते हुए इन्हें “डिजिटल रूप से हेरफेर” या “एआई-जनरेटेड” करार दिया है।

एक बड़े धोखे का विश्लेषण

सबसे अधिक साझा की गई तस्वीरों में से एक में युवा हिलेरी और बिल क्लिंटन को स्टीफन हॉकिंग, जे-जेड, बिल गेट्स, सीन ‘डिडी’ कॉम्ब्स और जेफरी एपस्टीन जैसे दिग्गजों के साथ एक पूल के सामने पोज देते हुए दिखाया गया था। इसके साथ किए गए दावे में स्थान को एपस्टीन का निजी द्वीप “लिटिल सेंट जेम्स” बताया गया था।

तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि इस तस्वीर में एआई द्वारा बनाई गई विशिष्ट खामियां थीं: जैसे हाथों की विकृत संरचना, चेहरे पर प्रकाश का असंगत प्रभाव और बैकग्राउंड में गहराई की कमी। इसके अलावा, न्याय विभाग (DOJ) की आधिकारिक एपस्टीन फाइलों में ऐसी किसी भी तस्वीर का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

एक अन्य तस्वीर में क्लिंटन को एक पार्टी में एपस्टीन की टाई ठीक करते हुए दिखाया गया था। फैक्ट-चेकिंग बॉट्स ने निष्कर्ष निकाला कि यह एक “अप्रामाणिक कंपोजिट” (Inauthentic Composite) तस्वीर थी। हालांकि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के एपस्टीन के विमान में यात्रा करने के दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन हिलेरी क्लिंटन को एपस्टीन के सामाजिक या व्यावसायिक दायरे से जोड़ने वाला कोई भी सत्यापित फोटो आज तक सामने नहीं आया है।

आधिकारिक खंडन और विशेषज्ञों की राय

क्लिंटन ने कमेटी के सामने पेश होने के बाद संवाददाताओं से कहा था, “मुझे नहीं पता कि मुझे कितनी बार यह कहना पड़ेगा कि मैं जेफरी एपस्टीन को नहीं जानती थी। मैं कभी उसके द्वीप पर नहीं गई, कभी उसके घर नहीं गई, और कभी उसके कार्यालय नहीं गई।”

राजनीतिक ‘डीपफेक’ के बढ़ते चलन पर टिप्पणी करते हुए डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अरविंद एस. ने कहा: “हम एक ऐसे खतरनाक युग में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ ‘देखना अब विश्वास करना नहीं रह गया है।’ ये एआई-जनरेटेड तस्वीरें विशेष रूप से लोगों के पूर्वाग्रहों का फायदा उठाने के लिए बनाई जाती हैं। भले ही इन्हें फर्जी साबित कर दिया जाए, लेकिन एक सम्मानित नेता को विवादित (भले ही काल्पनिक) स्थिति में देखने का प्रभाव जनता के अवचेतन मन में बना रहता है।”

पृष्ठभूमि: एपस्टीन फाइलें और दुष्प्रचार

जेफरी एपस्टीन से संबंधित अदालती दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद से ही षड्यंत्रकारियों को बढ़ावा मिला है। जहां इन दस्तावेजों ने एपस्टीन के कई वास्तविक सहयोगियों के नाम उजागर किए हैं, वहीं इसने “संगति के आधार पर दोषारोपण” करने वाले मीम्स की लहर भी पैदा कर दी है।

दुष्प्रचार अभियान अक्सर “हाइब्रिड-ट्रुथ” (Hybrid-truth) तकनीकों का उपयोग करते हैं—अर्थात वास्तविक तथ्यों (जैसे 2010 में चेल्सी क्लिंटन की शादी में घिसलेन मैक्सवेल की उपस्थिति) को पूरी तरह से मनगढ़ंत तस्वीरों के साथ मिला देना ताकि झूठ को सच जैसा दिखाया जा सके। यह घटना जेनरेटिव एआई के युग में राजनीतिक विमर्श की शुचिता बनाए रखने के लिए कानूनविदों और तकनीकी कंपनियों के सामने खड़ी बड़ी चुनौती को रेखांकित करती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.