सोना ₹1.5 लाख के पार, पीएम की ऐतिहासिक अपील
भारत में सोने की कीमतों ने एक ऐसा ऐतिहासिक स्तर छू लिया है जिसने वैश्विक वित्तीय गलियारों और आम भारतीय परिवारों, दोनों को चौंका दिया है। 24 कैरेट सोना आज ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया है। इस अभूतपूर्व वृद्धि के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम एक साहसी और असाधारण अपील की है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए “अगले एक साल तक सोना खरीदना और विदेश यात्रा पर जाना बंद करें।”
मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट के कारण सोने की कीमतों में यह उछाल आया है। इसके साथ ही, “मई 2026 में सोना खरीदें या नहीं” इंटरनेट पर सबसे अधिक खोजा जाने वाला सवाल बन गया है।
आज का भाव: शहर दर शहर की स्थिति
11 मई 2026 की सुबह तक, सोने और चांदी की कीमतें अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन कीमतें अभी भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं।
सोने और चांदी का भाव (मई 2026)
| श्रेणी | अनुमानित कीमत |
| 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) | ₹1,52,350 |
| 24 कैरेट सोना (1 ग्राम) | ₹15,235 |
| 22 कैरेट सोना (10 ग्राम) | ₹1,39,650 |
| 22 कैरेट सोना (1 ग्राम) | ₹13,965 |
| चांदी (1 किलोग्राम) | ₹2,60,000+ |
प्रधानमंत्री मोदी की “आर्थिक बलिदान” की अपील
एक विशेष संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने वर्तमान आर्थिक स्थिति को सामूहिक राष्ट्रीय कर्तव्य के क्षण के रूप में पेश किया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹95.43 के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। चूंकि भारत अपनी सोने की खपत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका भुगतान डॉलर में होता है, इसलिए सोने की भारी मांग विदेशी मुद्रा भंडार पर गहरा दबाव डाल रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह देश के लिए एक ज़रूरी बलिदान है। भारत की शक्ति उसके लोगों में है। यदि हम सब मिलकर केवल एक वर्ष के लिए सोना खरीदना बंद कर दें और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को टाल दें, तो हम अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान कर सकते हैं।” विशेषज्ञ इस अपील की तुलना 1962 और 1965 के युद्धों के दौरान की गई अपीलों से कर रहे हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नागरिकों से राष्ट्र रक्षा निधि के लिए सोना दान करने को कहा था। आज की “जंग” आर्थिक है, जो मुद्रा के गिरते मूल्य और व्यापार घाटे के खिलाफ लड़ी जा रही है।
महंगाई के तीन मुख्य कारण
बाजार विश्लेषकों ने इस भारी वृद्धि के पीछे तीन प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
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मध्य-पूर्व का संकट: अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकेबंदी ने वैश्विक अनिश्चितता को चरम पर पहुंचा दिया है। जब भी दुनिया में अस्थिरता होती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर भागते हैं।
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डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी: डॉलर पिछले 25 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है। कमजोर रुपये के कारण आयातित सोना भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बहुत महंगा हो गया है।
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केंद्रीय बैंकों की रणनीति: चीन, रूस और भारत सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने डॉलर भंडार को कम कर रहे हैं और सोने का स्टॉक बढ़ा रहे हैं। इस संस्थागत मांग ने कीमतों को नीचे नहीं गिरने दिया है।
शादी सीजन में आम आदमी की मुसीबत
मई और जून भारत में शादी-ब्याह का पीक सीजन होता है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि एक सामाजिक और वित्तीय आवश्यकता है। 22 कैरेट सोना लगभग ₹1.40 लाख होने के कारण, एक साधारण शादी के लिए लगने वाले 50 ग्राम सोने की कीमत ही अब ₹7 लाख से ऊपर पहुंच गई है।
दिल्ली के चांदनी चौक के एक वरिष्ठ जौहरी ने बताया, “व्यापार में 30-40% की गिरावट आई है। लोग अब हल्के वजन के गहने पसंद कर रहे हैं या फिर केवल रस्मों के लिए नाममात्र की खरीदारी कर रहे हैं। मध्यम वर्ग के लिए यह स्थिति बहुत कठिन हो गई है।”
चांदी की दौड़: सोने को भी पछाड़ा
हैरान करने वाली बात यह है कि प्रतिशत के लिहाज से चांदी की कीमतें सोने से भी तेज बढ़ी हैं। ₹2.6 लाख प्रति किलोग्राम को पार कर चुकी चांदी को वैश्विक ‘हरित ऊर्जा क्रांति’ से लाभ मिल रहा है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का भारी उपयोग होने के कारण इसकी औद्योगिक मांग आसमान छू रही है। वहीं, मैक्सिको और पेरू जैसे देशों में उत्पादन कम होने से आपूर्ति में भारी कमी आई है।
निवेशकों के लिए सलाह: क्या करें?
वित्तीय विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए निम्नलिखित सलाह दी है:
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अल्पकालिक (3-6 महीने): अभी बड़ी खरीदारी से बचें। प्रधानमंत्री की अपील के बाद घरेलू मांग में कमी आ सकती है, जिससे कीमतों में कुछ गिरावट की संभावना बन सकती है।
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दीर्घकालिक (2-5 साल): सोना हमेशा से मुद्रास्फीति के खिलाफ सबसे भरोसेमंद हथियार रहा है। लंबे समय के निवेश के लिए डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ईटीएफ (ETF) बेहतर विकल्प हैं क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और सुरक्षा का जोखिम नहीं होता।
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शादी के लिए: यदि शादी बहुत करीब है, तो किस्तों में खरीदारी करें। यदि शादी साल के अंत में है, तो प्रधानमंत्री की अपील के बाद बाजार की प्रतिक्रिया का इंतजार करना समझदारी होगी।
डॉ. एरिस वेटोस, एआई रणनीति और आर्थिक रुझान निदेशक के अनुसार: “सस्ते सोने का युग अब समाप्त हो चुका है। हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ कीमती धातुओं की कीमत केवल आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक औद्योगिक और राष्ट्रीय सुरक्षा संपत्ति के रूप में तय की जा रही है।”