विश्वनाथ-जगदीशिला डोली यात्रा का विसर्जन, श्रद्धालुओं के जयकारों से गुंजयमान हुआ विशोन पर्वत
देहरादून। श्री विश्वनाथ-जगदीशिला डोली यात्रा का अपने निर्धारित कार्यक्रम के अर्न्तगत गंगा दशहरा पर्व के शुभ अवसर पर अपने मुख्य पड़ाव विशोन पर्वत में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से विसर्जन हुआ। 29 अप्रैल को हरिद्वार से शुभारम्भ हुई यात्रा का विभिन्न देवालयों से होते हुए अपने भक्तों को दर्शन देने के बाद अपने धाम में पहुँचने पर भव्य स्वागत किया गया। विशोन पर्वत के शिवालय में स्वामी प्रकाशानंद ने कहा कि यह यात्रा अदभुत, अनोखी और अद्वितीय है। 27 साल से निरंतर अपना अभियान जारी रखे है। यात्रा संयोजक मंत्री प्रसाद नैथानी एक साधक के नाते नंगे पांव इसके सारथी है।
उत्तराखण्ड की देव संस्कृति को भावी पीढ़ी के लिए यह प्रेरणादायक धार्मिक आयोजन है जो सम्पूर्ण उत्तराखण्ड की आपस में जोड़ने का काम करती है। गढ़वाल-कुमाऊ तराई और जौनसार की लोक संस्कृति, धार्मिक पूजा पाठ के साथ ही मठ मंदिरों को एक सूत्र में पिरोने का यह अनूठा प्रमाण है। स्वामी जी ने सरकार से इस यात्रा को नंदा राजजात की तर्ज पर मान्यता देने और यात्रा के दौरान चिन्हित देवालयों को पर्यटन सर्किट में शामिल करने की मांग की। 24 मई को जगदीशिला में माँ की पूजा अर्चना के बाद यात्रा रात्रि में अपने मुख्य पड़ाव विशोन पर्वत पहुँची जहाँ साधु संतों एवं श्रद्धालुओं ने रात्रि जागरण किया इससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सुबह ब्रहममूर्हत में प्राकृतिक कुंड में स्थित शिवलिंग का जलाभिषेक और डोली स्नान के बाद पूजा अर्चना हुई इसके बाद मंदिर परिसर स्थित प्रांगण में विशाल हवन पूजन किया गया जिसमें शिव स्तुति मुख्य रही। अन्य स्थानों से आई देवडोलियों ने भी यहाँ भक्तों को आशीर्वाद दिया इसके बाद प्रसाद वितरण हुआ। यहाँ से डोली नीलाछाड मैदान पहुँची यहाँ यात्रा कथानाक पर सविस्तार समिति द्वारा प्रकाश डाला गया। यात्रा में सामाजिक, धार्मिक आध्यात्मिक, राजनैतिक प्रशासनिक सहित सभी वर्गों की भागीदारी रही। एशिया महाद्वीप में सनातन धर्म के सबसे विशाल श्री-यंत्र की स्थापना वाले अल्मोडा के लमगडा स्थित विश्व प्रसिद्ध संत स्वामी कल्याण दास महाराज स्वयं डोली की आगवानी करने पहुँचे, इस अवसर पर देश-विदेश से अन्य धर्माचार्य और श्रद्धालु उपस्थित थे। यहाँ डोल आश्रम में ही रात्रि विश्राम हुआ।
वहीं हरिद्वार में डोली का शुभारम्भ भारत माता मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी जी ने किया। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, वरिष्ठ सदस्य आमेश शर्मा ने डोली यात्रा का स्वागत किया। ऋषिकेश में दायित्वधारी भाजपा नेत्री गीता श्रीवास्तव की अगुवाई में स्वागत समारोह हुआ-नगर निगम देहरादून में मेयर भाजपा नेता सौरभथपलियाल, नगर आयुक्त आई.ए.एस. श्रीमती नमामी बंसल ने स्वागत किया। कांगेस नेता व यू. सी.डी.एफ. के चौयरमैन वीरेन्द्र पोखरियाल, पूर्व मंत्री नवप्रभात ने विकासनगर, उत्तरकाशी में गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित समाज ने डोली का मंत्रोच्चारण से स्वागत किया। भाजपा नेता व कोटद्वार के मेयर शैलेन्द्र रावत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल- पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, बद्रीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित अशोक टोडरिया, भाजपा नेता व दायित्वधारी खेमसिंह चौहान, आई.ए.एस. दीपक कुमार, उक्रांद नेता नवीन आचार्य पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, महेन्द्र सिंह लुंठी- डा. केदार पलडिया, खष्टी बिष्ट आदि ऐसे नाम है जो डोली के स्वागत करने वालों में प्रमुख रहे।
समापन समारोह में चन्द्रमा प्रोडक्शन के प्रबन्धक हैदराबाद में व्यवसायी, समाजसेवी बच्चन सिंह रावत द्वारा यात्रा संयोजक मंत्री प्रसाद नैथानी के अध्यात्म, धार्मिक स्वरूप और देव संस्कृति के उत्थान हेतु उनके दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए उनको स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा की उनकी साधना, एक तपस्वी की तरह है जो स्वयं को साधक के तौर पर यात्रा में चलते है।