AB Sun Life सौदे में बैंक ऑफ अमेरिका यूनिट पर SEBI के आरोप
भारतीय वित्तीय क्षेत्र में एक बड़ी हलचल पैदा करते हुए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने औपचारिक रूप से बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की एक घरेलू इकाई पर ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ नियमों के उल्लंघन और आंतरिक “चाइनीज वॉल” (Chinese Walls) को गिराने का आरोप लगाया है। ये आरोप मार्च 2024 में आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी (ABSL AMC) की शेयर बिक्री के दौरान बैंक के आचरण से संबंधित हैं।
30 अक्टूबर की तारीख वाले एक गोपनीय ‘कारण बताओ नोटिस’ के अनुसार, नियामक का आरोप है कि बैंक की ‘डील टीम’ ने अनुचित तरीके से ‘अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी’ (UPSI) उन विभागों और बाहरी निवेशकों के साथ साझा की, जिन्हें इसकी अनुमति नहीं थी। यह मामला एक ‘व्हिसलब्लोअर’ (भेदी) की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसने दुनिया के सबसे बड़े निवेश बैंकों में से एक के आंतरिक नियंत्रणों में संभावित विफलता को उजागर किया है।
नियमों के उल्लंघन का विवरण
सेबी की जांच का मुख्य केंद्र 28 फरवरी, 2024 (जब बैंक को शेयर बिक्री के प्रबंधन के लिए नियुक्त किया गया था) और 18 मार्च, 2024 (जब लेनदेन की औपचारिक घोषणा की गई थी) के बीच की अवधि है। भारतीय प्रतिभूति कानूनों के तहत, एक बार जब कोई निवेश बैंक किसी सौदे में शामिल हो जाता है, तो उसे एक “चाइनीज वॉल” बनाए रखनी होती है। यह दीवार डील टीम को बैंक के ब्रोकिंग, रिसर्च या सेल्स विभागों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने से रोकती है ताकि ‘हितों के टकराव’ या इनसाइडर ट्रेडिंग से बचा जा सके।
सेबी का आरोप है कि बीओएफए की डील टीम ने इन दीवारों को दरकिनार कर दिया और बैंक की रिसर्च और एशिया-पैसिफिक सिंडिकेट टीमों को संभावित निवेशकों से प्रतिक्रिया (फीडबैक) लेने का निर्देश दिया। नोटिस में विशेष रूप से तीन संस्थाओं के साथ बातचीत का उल्लेख है:
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HDFC लाइफ: भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी बीमा कंपनी।
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नॉर्गेस बैंक (Norges Bank): नॉर्वे का केंद्रीय बैंक।
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एनाम होल्डिंग्स (Enam Holdings): एक प्रमुख भारतीय निवेश फर्म।
नियामक का कहना है कि सार्वजनिक घोषणा से पहले इन संस्थाओं के साथ मूल्यांकन रिपोर्ट (Valuation Reports) और गोपनीय विवरण साझा किए गए थे, जो “जानने की आवश्यकता” (Need-to-know) के सिद्धांत का उल्लंघन है।
“चाइनीज वॉल” और आंतरिक नियंत्रण
“चाइनीज वॉल” का अर्थ है किसी संगठन के भीतर एक ऐसी आभासी सूचना बाधा जो उन जानकारियों के आदान-प्रदान को रोकती है जिनसे नैतिक या कानूनी संघर्ष पैदा हो सकता है। निवेश बैंकिंग में, यह बाजार की अखंडता का आधार है।
पूर्व सेबी अधिकारी और ‘रेगस्ट्रीट लॉ’ के सीनियर पार्टनर सुमित अग्रवाल कहते हैं, “यह मामला क्लासिक इनसाइडर ट्रेडिंग—जहाँ कोई त्वरित लाभ के लिए व्यापार करता है—की तुलना में एक मौलिक आंतरिक-नियंत्रण विफलता जैसा अधिक दिखता है। जब एक डील टीम संवेदनशील जानकारी होने के बावजूद बाजार को ‘वार्म अप’ करने के लिए ब्रोकिंग या रिसर्च विंग का उपयोग करती है, तो यह प्रतिभूति बाजार के समान अवसर (Level Playing Field) के सिद्धांत से समझौता करती है।”
जांच में बाधा और बयानों में बदलाव के आरोप
नियमों के उल्लंघन से भी अधिक गंभीर सेबी के वे दावे हैं जो जांच के दौरान बैंक के व्यवहार से संबंधित हैं। नोटिस के अनुसार, बैंक ने शुरुआत में निवेशकों के साथ किसी भी अनुचित बातचीत से इनकार किया था।
हालांकि, जब सेबी ने एचडीएफसी लाइफ और एनाम होल्डिंग्स से प्राप्त सबूत बैंक के सामने रखे, तब बैंक के बयानों में बदलाव आया। सेबी का कहना है कि बैंक ने शुरुआत में “असत्य बयान देने या भौतिक तथ्यों को छिपाने” की कोशिश की।
नवंबर 2024 में, बैंक ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को इस्तीफा देने के लिए कहा। हालांकि बैंक का तर्क था कि ये इस्तीफे “आंतरिक प्रोटोकॉल” के उल्लंघन के कारण थे, लेकिन सेबी इन इस्तीफों के समय और प्रकृति को कथित कदाचार के प्रमाण के रूप में देख रहा है।
बिना दोष स्वीकार किए समझौता (Settlement)
कानूनी और प्रतिष्ठित नुकसान को कम करने के लिए, बैंक ऑफ अमेरिका ने सेबी के पास एक “निपटान आवेदन” (Settlement Application) दायर किया है। सेबी के निपटान तंत्र के तहत, कोई इकाई निष्कर्षों को स्वीकार या अस्वीकार किए बिना शुल्क का भुगतान करके और कुछ सुधारात्मक उपायों पर सहमत होकर जांच को बंद कर सकती है।
यह मार्ग उन मामलों में सामान्य है जहाँ लंबी कानूनी लड़ाई फर्म के संचालन के लिए हानिकारक हो सकती है। हालांकि, सेबी द्वारा इस समझौते को स्वीकार करना अनिवार्य नहीं है, विशेष रूप से उन मामलों में जहाँ नियामक को गलत जानकारी देने के आरोप हों।
बाजार पर प्रभाव
177 मिलियन डॉलर की शेयर बिक्री आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के लिए एक महत्वपूर्ण लेनदेन था। हालांकि एएमसी या उल्लेखित निवेशकों पर किसी गलत काम का आरोप नहीं लगा है, लेकिन बैंक ऑफ अमेरिका पर जांच भारतीय पूंजी बाजारों में प्रचलित “प्री-मार्केटिंग” प्रथाओं पर सवाल उठाती है।
| संस्था | जांच में भूमिका | स्थिति |
| सेबी (SEBI) | नियामक | कारण बताओ नोटिस जारी किया |
| बीओएफए सिक्योरिटीज | निवेश बैंक | निपटान के लिए आवेदन किया |
| एबी सन लाइफ एएमसी | जारीकर्ता | शेयर बिक्री का विषय |
वैश्विक बैंकों के लिए चेतावनी
बीओएफए बनाम सेबी मामला एक सख्त अनुस्मारक है कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों को अपनी आंतरिक अनुपालन संस्कृति को स्थानीय नियामक अपेक्षाओं के साथ जोड़ना होगा। जैसे-जैसे भारत के बाजार परिपक्व हो रहे हैं, सेबी ने “प्रक्रिया-आधारित” उल्लंघनों की जांच के प्रति अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
निपटान आवेदन का परिणाम कानूनी और वित्तीय समुदाय द्वारा बारीकी से देखा जाएगा। यह तय करेगा कि क्या यह जांच केवल मौद्रिक दंड तक सीमित रहेगी या बहुराष्ट्रीय बैंकों के कामकाज के तरीके में बड़े बदलाव लाएगी।