पद्मश्री प्रो. संजय चिकित्सा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए ‘वेलनेस एमिनेंस अवॉर्ड’ से सम्मानित
देहरादून! पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात अस्थि रोग विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, लेखक, कवि, स्तंभकार एवं समाजसेवी प्रो. डॉ. भूपेन्द्र कुमार सिंह संजय को कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय वेलनेस कॉन्क्लेव-2026 में प्रतिष्ठित ‘वेलनेस एमिनेंस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान चिकित्सा, समाजसेवा, जनस्वास्थ्य जागरूकता एवं समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. संजय की चिकित्सा एवं शैक्षणिक सेवाओं का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। वे 50 से अधिक देशों में विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक मंचों पर व्याख्यान देकर अपना अनुभव और ज्ञान साझा कर चुके हैं। चिकित्सा को मानव सेवा का माध्यम मानने वाले डॉ. संजय ने दिव्यांगता की रोकथाम, पोलियो एवं सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों की सुधारात्मक शल्य चिकित्सा, सड़क सुरक्षा जागरूकता तथा सामुदायिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। वे अब तक 300 से अधिक निःशुल्क चिकित्सा एवं सुधारात्मक शल्य चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर चुके हैं अथवा उनमें सक्रिय सहभागिता निभा चुके हैं।
निवारक स्वास्थ्य सेवाओं एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए डॉ. संजय दो महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर बल देते हैं। HEN (Health, Education and Nutrition — स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पोषण) मानव विकास के तीन मूलभूत स्तंभों को रेखांकित करता है, जबकि DEWS (Diet, Exercise, Work and Sleep — आहार, व्यायाम, कार्य एवं निद्रा) स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली के चार आवश्यक घटकों को दर्शाता है। उनका मानना है कि नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर रोगों की पहचान और जागरूक जीवनशैली अपनाकर अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। उनका मूल संदेश है—‘जान है तो जहान है।’ चिकित्सा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को पद्मश्री, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तथा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से मान्यता मिली है। इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य एवं कल्याण के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। डॉ. संजय को प्रदान किया गया यह सम्मान चिकित्सा उत्कृष्टता, मानवीय संवेदना और स्वस्थ समाज के निर्माण के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता का सम्मान है।