सरकारी जमीनों की लीज निरस्त कर मूल विभागों को लौटाएं संपत्तियां : कांग्रेस – BBN Bharat

सरकारी जमीनों की लीज निरस्त कर मूल विभागों को लौटाएं संपत्तियां : कांग्रेस

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-राज्यपाल से मिला 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, धामी सरकार पर बेशकीमती जमीनें औने-पौने दामों पर निजी हाथों में सौंपने का आरोप

-गणेश जोशी की आय से अधिक संपत्ति, कोरोना काल की भर्तियों और एमबीबीएस दाखिलों की जांच की भी मांग

देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी हाथों में सौंपने के मुद्दे पर कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकारी संपत्तियों को औने-पौने दामों पर निजी संस्थाओं को देने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट मसूरी सहित विभिन्न सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण और लीज संबंधी निर्णयों को निरस्त कर उन्हें उनके मूल विभागों को लौटाने की मांग की।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि राज्य की बेशकीमती सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों के निजीकरण की प्रक्रिया में संवैधानिक प्रावधानों, कार्य नियमावली और संबंधित अधिनियमों का उल्लंघन किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने इन मामलों की स्वतंत्र जांच कराने और संबंधित शासनादेशों को निरस्त करने की मांग की।

जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ भूमि को निजी कंपनी को 15 वर्ष के लिए लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि हजारों करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली इस ऐतिहासिक संपत्ति को जिस प्रक्रिया के तहत लीज पर दिया गया, उसमें पारदर्शिता का अभाव रहा।

ज्ञापन में प्रकाशित कंपनी अभिलेखों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि निविदा प्रक्रिया में शामिल तीनों कंपनियां एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकारी संपत्तियों के आवंटन में प्रतिस्पर्धा का आभास पैदा कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से संबंधित सभी पत्रावलियां तलब करने, लीज निरस्त करने और पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

मुख्यमंत्री के स्तर पर अधिकार केंद्रित करने का आरोप

कांग्रेस ने 20 दिसंबर 2022 के मंत्रिमंडल के निर्णय पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि इस निर्णय के तहत सभी विभागों की सरकारी भूमि से संबंधित अंतिम निर्णय का अधिकार मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया, जो मंत्रिमंडल के सामूहिक उत्तरदायित्व और कार्य नियमावली के प्रावधानों के विपरीत है।

ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) अधिनियम, 2023 के तहत सरकारी भूमि और संपत्तियों के हस्तांतरण तथा मुद्रीकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कांग्रेस ने दावा किया कि संबंधित विभागों के मंत्रियों की सहमति के बिना ही संपत्तियों को हस्तांतरित करने के निर्णय लिए गए।

पार्टी ने पटवाडांगर, नगऊ, धनौल्टी, मगरा, आईडीपीएल ऋषिकेश, डाकपत्थर, रामगढ़, एचएमटी रानीबाग, पाटकोट-मरचूला, सलेमपुर महमूद और माजरी ग्रांट सहित विभिन्न क्षेत्रों की सरकारी भूमि के हस्तांतरण पर भी आपत्ति जताई।

राजस्व अभिलेखों और वन कानूनों के उल्लंघन का आरोप

कांग्रेस ने पटवाडांगर की भूमि के हस्तांतरण को लेकर राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित भूमि के स्वामित्व और अभिलेखीय स्थिति पर गंभीर सवाल हैं।

ज्ञापन के अनुसार, पटवाडांगर की 108 एकड़ भूमि वन विभाग और राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं डाकपत्थर की भूमि को भी बंदोबस्त पूरा हुए बिना और खसरा संख्या के अभाव में हस्तांतरित किए जाने का आरोप लगाया गया।

कांग्रेस ने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की इमारतों वाली भूमि के हस्तांतरण पर रोक संबंधी शासनादेशों की अनदेखी का भी आरोप लगाया। पार्टी ने हरिद्वार के अलकनंदा होटल, ऋषिकेश सहित 25 निरीक्षण भवनों और रामगढ़ के राजकीय उद्यान की भूमि को लेकर आपत्तियां दर्ज कराईं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि रामगढ़ के राजकीय उद्यान की लगभग चार हेक्टेयर भूमि पर घना वन होने के बावजूद उसके गैर-वन उपयोग की प्रक्रिया वन संरक्षण कानून के विपरीत हो सकती है।

90 साल की लीज और संपत्तियों के मूल्यांकन पर सवाल

कांग्रेस ने पटवाडांगर की 13.64 एकड़ भूमि को 90 वर्ष के लिए 37.80 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर निविदा में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए।

ज्ञापन में कहा गया कि अनुशंसा समिति की 29 अगस्त 2025 की बैठक के कार्यवृत्त में भूमि के मूल्य और राजस्व साझेदारी पर चर्चा आगामी बैठक में किए जाने का उल्लेख था। इसके बावजूद भूमि को निविदा प्रक्रिया में शामिल कर दिया गया।

कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य की लगभग 40 सरकारी संपत्तियां 13 में से 12 जिलों में स्थित हैं और उनका बाजार मूल्य अत्यधिक है। पार्टी ने इन संपत्तियों को मूल विभागों को वापस करने की मांग की।

गणेश जोशी की आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई की मांग

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले को भी राज्यपाल के समक्ष उठाया।

ज्ञापन में कहा गया कि न्यायालय की ओर से मुकदमा दर्ज करने की अनुमति से संबंधित निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने अभी तक आवश्यक अनुमति प्रदान नहीं की है। कांग्रेस ने इस मामले में तत्काल वैधानिक अनुमति और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।

कोरोना काल की भर्तियों और एमबीबीएस दाखिलों की जांच की मांग

कांग्रेस ने सहकारिता विभाग में कोरोना काल के दौरान हुई भर्तियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

पार्टी का आरोप है कि महामारी के दौरान आयोजित भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरी दिए जाने के गंभीर आरोप सामने आए थे। कांग्रेस ने कहा कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके अलावा एमबीबीएस दाखिलों में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला भी उठाया गया। कांग्रेस ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताएं योग्य विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन हैं। पार्टी ने मामले की समयबद्ध जांच और अनुचित तरीके से प्राप्त दाखिलों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।

मंत्री रेखा आर्य से जुड़े कथित 210 करोड़ के मामले की जांच की मांग

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्यपाल के संज्ञान में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति की ओर से लगाए गए कथित 210 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों को भी रखा।

गोदियाल ने इस प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के माध्यम से जांच कराने की मांग की।

दस दिन में निर्णय वापस लेने का अल्टीमेटम

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मांग की कि जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त की जाए, मुख्यमंत्री के स्तर पर लिए गए संबंधित निर्णयों और शासनादेशों को वापस लिया जाए तथा यूआईआईडीबी और सिडकुल को हस्तांतरित सभी जमीनें एवं संपत्तियां उनके मूल विभागों को लौटाई जाएं।

पार्टी ने पटवाडांगर, अलकनंदा होटल हरिद्वार और ऋषिकेश निरीक्षण भवन से संबंधित तीन निविदाओं को तत्काल निरस्त करने की मांग भी की।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ज्ञापन प्राप्त होने के दस दिनों के भीतर यदि संबंधित निर्णय वापस नहीं लिए गए और संपत्तियां मूल विभागों को नहीं लौटाई गईं, तो कांग्रेस राज्य की जनता की संपत्ति बचाने के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होगी।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकारी संपत्तियों, भर्ती प्रक्रिया और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सरकार की चुप्पी और कार्रवाई में देरी से प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिलने का संदेश जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे: प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह और राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सुरेंद्र सिंह रांगड़ और राजेश चमोली सहित अन्य नेता शामिल रहे।

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