5 से 25 सितंबर तक निकलेगी नंदादेवी लोकजात यात्रा, नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा में मंदिर समिति की बैठक में लिया गया फैसला
-विशेष पूजा के बाद नंदा देवी को कैलाश विदाई दी जाएगी
चमोली। नंदादेवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली से आयोजित होने वाली नंदादेवी लोकजात यात्रा के लिए बधाण क्षेत्र के सयानों ने वर्ष 2026 का दिन-पट्टा जारी कर दिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार यात्रा 5 से 25 सितंबर तक आयोजित होगी।
बुधवार को नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा में मंदिर समिति के अध्यक्ष भुवन हटवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यात्रा की तैयारियों और मार्ग की व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। केंद्रीय समिति के अध्यक्ष सुशील रावत और सचिव पृथ्वीपाल सिंह बुटोला ने बताया कि वर्ष 2027 में श्री नंदादेवी राजजात का आयोजन प्रस्तावित है। इसी कारण इस वर्ष प्रतिवर्ष निकलने वाली नंदादेवी लोकजात यात्रा निर्धारित परंपरा के अनुसार आयोजित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि थराली, देवराड़ा, कुलसारी और वांण में हुई बैठकों तथा कुरूड़ के गौड़ ब्राह्मणों से विचार-विमर्श के बाद यात्रा का दिन-पट्टा जारी किया गया है। पूर्व में जारी कार्यक्रम में कुछ आंशिक संशोधन भी किए गए हैं। इस वर्ष भी यात्रा वेदनी बुग्याल तक जाएगी। वहां विशेष पूजा के बाद नंदा देवी को कैलाश विदाई दी जाएगी और यात्रा वापस देवराड़ा लौटेगी।
बैठक में यात्रा मार्ग, पड़ावों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया। इस अवसर पर कलम सिंह रावत, प्रेमशंकर सिंह रावत, गौरी देवी, लीला देवी, मनोज सिंह परिहार, दर्शन सिंह, मनमोहन सिंह, रणजीत सिंह, भुवन विक्रम सिंह, हरीश सती, आशा देवी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
जारी कार्यक्रम के अनुसार 5 सितंबर को यात्रा नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से प्रस्थान कर चरबंग पहुंचेगी। इसके बाद क्रमशः 6 सितंबर को मदकोट, 7 को उस्तोली, 8 को भेटी, 9 को सोल डुंग्री, 10 को सूना, 11 को चेपड़ो, 12 को धरातल्ला, 13 को इच्छोली, 14 को फल्दियागांव, 15 को मुंदोली, 16 को वांण और 17 सितंबर को गैरोली पातल पहुंचेगी। 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल में विशेष पूजा के बाद यात्रा वापसी शुरू करेगी। वापसी में यात्रा 18 सितंबर को बांक, 19 को ल्वाणी, 20 को उलंग्रा, 21 को बेराधार, 22 को गोठिंड़ा, 23 को कुराड़, 24 को ढुंगाखोली होते हुए 25 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी। यहां पूजा-अर्चना के बाद देवी की डोली मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होगी।
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