जलवायु अनुकूल स्कूल बच्चों को स्वस्थ रखने और बेहतर सीखने में मदद कर रहे
ऋषिकेश: जलवायु परिवर्तन अब बच्चों के रोज़मर्रा के जीवन को लगातार प्रभावित कर रहा है। अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी से लेकर बाढ़ और खराब साफ-सफाई जैसी चुनौतियां बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर बुरा असर डाल रही हैं। इससे उनकी स्कूली शिक्षा में रुकावट आ रही है और उनके सीखने व आगे बढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
इस बात को समझते हुए, दुनिया की बेहतरीन स्वास्थ्य और स्वच्छता कंपनी, रेकिट ने अपने प्रमुख अभियान ‘डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया’ के तहत, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में ‘डेटॉल क्लाइमेट रेजिलीनिएंट स्कूल्स’ (डीसीआरएस) यानी जलवायु-अनुकूल स्कूल कार्यक्रम की शुरुआत की। यह पहल भारत सरकार के ‘मिशन लाइफ’ (लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट) के अनुरूप स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए रेकिट की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस पहल के हिस्से के रूप में, रेकिट ने चार धाम क्षेत्र, उत्तरकाशी में गंगोत्री और यमुनोत्री, रुद्रप्रयाग में केदारनाथ और बद्रीनाथ में जलवायु-अनुकूल स्कूल स्थापित किए हैं। यह कार्यक्रम तीन मुख्य स्तंभों – कैंपस, सहयोग और पाठ्यक्रम पर आधारित है। यह बच्चों को पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाने और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के योग्य बनाने के लिए स्कूल के बुनियादी ढांचे, साझेदारियों और शैक्षिक सामग्री में जलवायु अनुकूलन को जोड़ता है।
इस पहल के प्रभाव को समझने के लिए, एम्स ऋषिकेश द्वारा क्षेत्र के चार जलवायु-अनुकूल स्कूलों और नौ सामान्य स्कूलों में एक मूल्यांकन किया गया।
मूल्यांकन में यह भी देखा गया कि इन स्कूलों में स्वच्छता की आदतें अब छात्रों के खुद के स्वभाव में शामिल हो चुकी हैं। बच्चे अपने घरों में हाइजीन एंबेसडर बनकर उभरे हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों को भी स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि स्कूल पूरे समाज के व्यवहार को बदलने में एक उत्प्रेरक का काम कर रहे हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सेना ने कहा, “हमारे मूल्यांकन में उत्तराखंड के 13 सरकारी स्कूलों का अध्ययन किया गया, जिनमें चार डेटॉल जलवायु अनुकूल स्कूल और 9 सामान्य स्कूल शामिल थे। निष्कर्ष बताते हैं कि जिन स्कूलों में यह कार्यक्रम चलाया गया, वहां के छात्रों ने हाथ की स्वच्छता के प्रति अधिक जागरूकता दिखाई, वे सुरक्षित पानी और पानी से होने वाली बीमारियों के बारे में अधिक जानते थे। साथ ही, उन्हें साफ पानी, बेहतर शौचालय सुविधाओं और अन्य जलवायु-अनुकूल उपायों का लाभ मिला।